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Saturday, 27 February 2021

गैस सिलेंडर बेचने सड़क पर उतरी महिलाएं, बोलीं- उज्ज्वला योजना में मिला था, अब 900 रुपये में खरीदने की औकात नहीं

गैस सिलेंडर बेचने सड़क पर उतरी महिलाएं, बोलीं- उज्ज्वला योजना में मिला था, अब 900 रुपये में खरीदने की औकात नहीं

  

देश में एलपीजी गैस की कीमत लगातार बढ़ती ही जा रही है. रसोई गैस के दाम बढ़ने से परेशान महिलाएं राजधानी पटना में सड़कों पर उतरीं. महिलाओं ने रसाई गैस की बढ़ती कीमतों के विरोध का नया रूप अपनाया और वह उज्ज्वला योजना में मिला गैस सिलेंडर बेचने सड़क पर उतर गईं. महिलाओं ने कहा कि  उन्हें अब 900 रुपये में गैस सिलेंडर खरीदने का पैसा नहीं जुट रहा है.


 शनिवार को पटना सिटी पटना सिटी के अशोक राज पथ पर कई महिलाएं रसोई गैस का सिलेंडर लेकर सड़क पर उतर आईं.उनका कहना है महंगी रसोई गैस का पैसा नहीं जुट रहा है. इसलिए वे अपने अपने गैस सिलेंडर को बेचने आई हैं. प्रदर्शन कर रही महिलाएं जो सिलेंडर लेकर आईं थीं, उसके ऊपर पोस्टर चिपका था, जिसेक ऊपर अलग-अलग नारे लिखे हुए थे. किसी पर लिखा था- उज्ज्वला योजना का सिलेंडर बिक्री का है, तो किसी पर लिखा था- गैस महंगी, सब्सिडी खत्म इसलिए सिलेंडर बेचने आए हम.


सड़क पर सिलेंडर के साथ प्रदर्शन के साथ कर रहीं नीलम देवी ने कहा कि हम यहां सिलेंडर बेचने आए हैं. इसलिए आए हैं कि हमसे 900 रुपए का गैस सिलेंडर नहीं खरीदा जाएगा. कोरोना महामारी के कारण सभी बाल-बच्चों का काम-धंधा छूट गया है. सभी लोग घर में बैठे हुए हैं. खाने के लाले पर गए हैं. इसलिए हम सिलेंडर बेचना चाहते हैं, जो पैसे मिलेंगे, उससे कम से कम कुछ दिन का तो गुजारा हो जाएगा. 


महिलाओं का कहना है कि कोरोना महामारी से लोग अभी उभरे ही नहीं हैं. पर से तीन बार घरेलू रसोई गैस के कीमतों में बढ़ोतरी कर दी गई है, जिसके कारण गरीबी रेखा से नीचे वाले लोग, जिन्हें सरकार ने सिलेंडर तो दिया है. वह अब महंगे सिलेंडर खरीदने की स्थिति में नहीं हैं. प्रदर्शन के दौरान महिलाओं ने केंद्र सरकार से कीमतों पर नियंत्रण रखने की मांग की और मूल्य वृद्धि को अविलंव वापस लेने की अपील की.


प्रदर्शन में शामिल एक महिला ने कहा कि 500 से बढ़ते-बढ़ते गैस का दाम 900 रुपया हो गया है. सरकार हर महीने चुपके से दाम बढ़ा देती है. इतना महंगा सिलेंडर हम कैसे खरीदें, कहां से पैसे लाएं. यहां जमा हुए सभी लोग गरीब हैं, अमीर लोगों को तो दाम बढ़ने से कोई फर्क नहीं पड़ता लेकिन हम गरीबों पर पड़ता है।

Sunday, 2 August 2020

Happy friendship day


Happy friendship day 


```मैनें एक दोस्त को फोन किया और कहा कि यह मेरा नया नंबर है, सेव कर लेना।

उसने बहुत अच्छा जवाब दिया और मेरी आँखों से आँसू निकल आए ।

उसने कहा तेरी आवाज़ मैंने सेव कर रखी है। नंबर तुम चाहे कितने भी बदल लो, मुझे कोई फर्क नहीं पड़ता। मैं तुझे तेरी आवाज़ से ही पहचान लूंगा।

ये सुन के मुझे हरिवंश राय बच्चनजी की बहुत ही सुन्दर कविता याद आ गई....

"अगर बिकी तेरी दोस्ती तो पहले खरीददार हम होंगे।
तुझे ख़बर ना होगी तेरी कीमत, पर तुझे पाकर सबसे अमीर हम होंगे॥

"दोस्त साथ हों तो रोने में भी शान है।
दोस्त ना हो तो महफिल भी शमशान है॥"

"सारा खेल दोस्ती का हे ए मेरे दोस्त,
                  वरना..
जनाजा और बारात एक ही समान है।"```

*सारे दोस्तों को समर्पित. !*
मैत्रिदिनाच्या सर्वांना खूप खूप शुभेच्छा,,,💐💐💐
Happy friendship day 😘😘😘

Friday, 10 July 2020

इस्‍लाम में 786 अंक शुभ क्‍यों माना जाता है

 
                            



इस्लाम में 786 का बहुत महत्व होता है. क्रेज़ इतना है कि हर कोई इस अंक के नोंटों को इकठ्ठा करता है और अपने पर्स में ज़रूर रखता है. कुछ लोग तो गाड़ी भी इसी नंबर की लेते हैं.


अमिताभ बच्चन की फिल्म 'दीवार' और 'कुली' में आपको 786 अंक का कनेक्शन तो याद होगा. इन दोनों ही फिल्म में आपको इस नंबर की काफी अहमियत दिखाई गई है. वो इसीलिए क्योंकि इस्लाम में 786 का बहुत महत्व होता है. क्रेज़ इतना है कि हर कोई इस अंक के नोंटों को इकठ्ठा करता है और अपने पर्स में ज़रूर रखता है. कुछ लोग तो गाड़ी भी इसी नंबर की लेते हैं. इस्लाम में ये विश्वास है कि नंबर को स्मरण करने से सभी कामों में बरकत होती है. 

इसे पीछे की वजह ये है कि हर मुस्लिम इस अंक को बिस्मिल्ला का रूप मानता है. ऐसा माना जाता है कि अरबी या उर्दू में 'बिस्मिल्ला अल रहमान अल रहीम' को लिखेंगे तो उसका योग 786 आता है. इसीलिए इस अंक को इस्लाम मानने वाला हर व्यक्ति पाक मानता है. 

Saturday, 13 June 2020

मृत्यूपूर्वी वडिल आपल्या मुलाला म्हणाले, "माझ्या आजोबांनी मला दिलेले हे *घड्याळ* आहे. हे जवळजवळ *२०० वर्षे जुने* आहे.








मृत्यूपूर्वी वडिल आपल्या मुलाला म्हणाले, 
"माझ्या आजोबांनी मला दिलेले हे *घड्याळ* आहे. हे जवळजवळ *२०० वर्षे जुने* आहे.

मी ते तुला देतो, तु *दागिन्यांच्या दुकानात* जा. त्यांना सांग की मला ते विकायचे आहे आणि ते आपल्याला किती ऑफर देतायत ते पहा.
"मुलगा दागिन्याचा दुकानदाराकडे गेला आणि परत वडिलांकडे गेला, आणि म्हणाला, "त्यांनी *१५० रू* ऑफर केले कारण ते फारच जुने आहे."

वडिल म्हणाले, "आता *मोहरांच्या दुकानात* जा."  मुलगा मोहराच्या दुकानात गेला आणि परत वडिलांकडे येवून म्हणाला, "त्यांनी *२० रू* अॉफर केले कारण ते खूप खराब आहे."

वडिलांनी मुलाला घड्याळ घेऊन *संग्रहालयात* जायला सांगितलं.  तो संग्रहालयात गेला आणि येताना आनंदाने घरी आला.  "बाबा, क्युरेटरने या दुर्मिळ तुकड्यास त्याच्या मौल्यवान वस्तूंच्या संग्रहालयात समाविष्ट करण्यासाठी *५ लाख* ची ऑफर दिली."


वडिल शांतपणे स्मितहास्य करत म्हणाले, मला तुला हेच सांगायचे होते की *योग्य ठिकाणीच* तुमच *योग्य मूल्य* आहे. 

स्वतःला चूकीच्या जागी शोधू नका आणि तुमचे *मूल्य* नसल्यास रागावू नका. 

ज्यांना आपले *मूल्य* माहित आहे तेच आपली प्रशंसा करतात.आपली *किंमत जाणून घ्या* म्हणजे अशा व्यक्ती पासून दुर रहा ज्याना आपली किंमत  नाही ।
🌹

Monday, 25 May 2020

मुंसी प्रेमचंद्र द्वारा लिखी इस कहानी को हम लोगो ने 5 क्लास की हिंदी कि किताब में पढ़ी थी





मुंसी प्रेमचंद्र द्वारा लिखी इस  कहानी को हम लोगो ने 5 क्लास की हिंदी कि किताब में पढ़ी थी

बचपन में 5 कक्षा में एक कहानी पढ़ी थी हिंदी कि किताब में *ईदगाह*

हामिद अपनी दादी के लिए चिमटा खरीद के लता है।

काफी भवनिक और मानवीय संवेदना तथा एक दादी पोते के प्रेम को दिखाता है।

कैसे हामिद ने ना मिठाई खाई ना खिलौने लिए मेले में बस वह सब का मुंह देख कर मन को नियंत्रित करके रहा और अंत में उसे अपने दादी के जले हाथ की याद आई कैसे रोटी पकाते वक्त उसके हाथ जल जाते
और हामिद में चिमटा खरीदा

यह पर्व मानवीय संवेदना मानवता और आपसी प्रेम का पर्व है

Saturday, 23 May 2020

Happy Eid Day! SMS Greetings


Accept the blessings of Allah with all your heart and forget the sorrows that burden your soul. Enjoy the moments you share with your family. Happy Eid Day!

Thursday, 7 May 2020

*17 मई का इंतज़ार ना करें* सरकार एक निश्चित समय तक ही *lockdown* रख सकती है धीरे धीरे lockdown खत्म हो जाएगा सरकार भी इतनी सख्ती नहीं दिखाएगी *क्योंकि :* *सरकार ने आपको कोरोना बीमारी के बारे में अवगत करा दिया है, सोशल डिस्टैंसिंग, हैण्ड सेनिटाइजेशन इत्यादि सब समझा दिया है।*

.         *17 मई का इंतज़ार ना करें*
          सरकार एक निश्चित समय तक ही *lockdown* रख सकती है धीरे धीरे lockdown खत्म हो जाएगा सरकार भी इतनी सख्ती नहीं दिखाएगी
          *क्योंकि :*
          *सरकार ने आपको कोरोना बीमारी के बारे में अवगत करा दिया है, सोशल डिस्टैंसिंग, हैण्ड सेनिटाइजेशन इत्यादि सब समझा दिया है।*
          *बीमार होने के बाद की स्थिति भी आप लोग देश और दुनिया में देख ही रहे है।*
          अब जो समझदार है वह आगे लंबे समय तक अपनी दिनचर्या, काम करने का तरीका समझ ले। 

          *सरकार 24 घंटे  365 दिन आपकी चौकीदारी नहीं करेगी*
*आपके एवं आपके परिवार का भविष्य आपके हाथ में है।*
          लोकडॉन खुलने के बाद सोच समझ कर घर से निकले एवं काम पर जाये... व नीयत नियमानुसार ही अपना कार्य करे l
          😊क्या लगता है आपको, 17 मई के बाद एकाएक कोरोना चला जायेगा, हम पहले की तरह जीवन जीने लगेंगे ?
          *नही, कदापि नही।*
          ये वायरस अब हमारे देशऔर दुनिया में जड़ें जमा चुका है, हमे इसके साथ रहना सीखना पड़ेगा।
          *कैसे ?*
          सरकार कब तक लॉक डाउन रखेगी ?
          कब तक बाहर निकलने में पाबंदी रहेगी ?
          *हमे स्वयं इस वायरस से लड़ना पड़ेगा, अपनी जीवन शैली में बदलाव करके, अपनी इम्युनिटी स्ट्रांग करके।*
          *हमे सैकड़ों साल से चली रही पुरानी जीवन शैली अपनानी पड़ेगी।*
          *शुद्ध आहार लें, शुद्ध मसाले खाएं।*
          आंवला, एलोवेरा, गिलोय, काली मिर्च, लौंग, दालचीनी, लविंग, अदरक, हल्दी आदि पर निर्भर हों कर एन्टी बाइटिक्स के चंगुल से खुद को आज़ाद करें।
          अपने भोजन में पौष्टिक आहार की मात्रा बढ़ानी होगी, फ़ास्ट फ़ूड, पिज़्ज़ा, बर्गर, कोल्ड्रिंक की भूल जाएं तो बेहतर होगा।
          अपने बर्तनों को बदलना होगा, अल्युमिनियम, स्टील, टेफ़लोन कोटिंग आदि से निजात पानी होगी, हमे भारी बर्तन जैसे पीतल, कांसा, तांबा, मिट्टी को अपनाना होगा जो प्राकर्तिक रूप से वायरस की खत्म करते हैं।
          अपने आहार में दूध, दही, घी की मात्रा बढ़ानी होगी।
          *भूल जाइए जीभ का स्वाद, तला-भुना मसालेदार, होटल वाला कचरा।*
          *कम से कम अगले 2 -3 साल तक तो ये करना ही पड़ेगा।*
          तभी हम सरवाइव कर पाएंगे।
          जो नही बदले वो खत्म हो जाएंगे।
       समझदार और व्यवहारिक बने और इस बात को मान कर इन पर अमल करना शुरू कर दें।
          *जिंदगी आपकी फैसला आपका।*

राज्यात, परराज्यात असा प्रवास करता येणार

राज्यात, परराज्यात असा प्रवास करता येणार
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केंद्र सरकारने जाहीर केलेल्या नियमावलीनुसार राज्य सरकारनेही नियमावली बनवली असून अडकलेल्या लोकांसाठी परराज्यात तसेच राज्यात प्रवास करण्यासाठी रेल्वे आणि बस सोडण्यात येणार आहेत. मात्र परराज्यात जाऊ इच्छिणाऱ्या लोकांनी ग्रुप लिडरच्या माध्यमातून जवळच्या पोलीस ठाण्यात अर्ज करायचे आहेत, अशी माहिती परिवहन मंत्री अनिल परब यांनी दिली. राज्यात जाणाऱ्या प्रवाशांसाठीही प्रवासाची परवानगी दिली जाणार असून महापालिका आयुक्त आणि जिल्हाधिकारी परवानगी देत नाहीत, तोपर्यंत कुणीही प्रवास करू शकणार नाही. बसने जायचे असल्यास २५ जणांना आणि ट्रेनने जायचे असल्यास १ हजार जणांना पाठवले जाणार आहे. त्यासाठी ग्रुप लिडरच्या माध्यमातूनच अर्ज करून परवानगी घ्यावी लागणार आहे. परराज्यात जाण्यापूर्वी कोरोनाची लक्षणे नसल्याचे डॉक्टरांचे प्रमाणपत्र आवश्यक असेल.
कंटेनमेंट झोनमधील व्यक्तींना मात्र कुठेही बाहेर जाता येणार नाही. संबंधित राज्याची एनओसी मिळाल्यानंतरच त्यांना सोडण्यात येईल.
जिल्हाधिकारी आणि महापालिका आयुक्तांनी ठरवलेल्या कंटेनमेंट झोनमध्ये कोणत्याही प्रकारची वाहतूक होणार नाही. या झोनमध्ये कोणी आत येणार नाही, तसेच कुणी बाहेरही जाणार नाही. मुंबई महानगर विभाग म्हणजे मुंबईसह ठाणे, पालघर, कल्याण-डोंबिवली, नवी मुंबई, पनवेल तसेच पुणे, पिंपरी-चिंचवड इथे प्रत्येक गोष्ट काळजीपूर्वक केली जाईल. या भागात जिल्हाधिकारी किंवा आयुक्त परवानगी देत नाहीत, किंवा कंटेनमेंट झोनच्या सीमा ठरत नाहीत, तोपर्यंत कुणीही बाहेर जाऊ शकणार नाही. मालेगाव, सोलापूर, अकोला, अमरावती, यवतमाळ, नागपूर या हॉटस्पॉट विभागात कोणतीही प्रवासी वाहतूक होण्याआधी अतिदक्षता घेण्यात येणार आहे.

जे कोणी प्रवास करणार आहेत, त्यांच्याकडे डॉक्टरांचे प्रमाणपत्र असणे आवश्यक आहे. संबंधित व्यक्तिला फ्लू किंवा फ्लूसारख्या कोणत्याही आजाराची लक्षणं नाहीत आणि तिचं स्क्रीनिंग करण्याची गरज नाही, असं त्यात नमूद केले असेल तरच प्रवासाची परवानगी मिळेल.
नोडल अधिकाऱ्याने प्रवास करणाऱ्या प्रवाशांची माहिती तो प्रवासी ज्या ठिकाणी जाणार आहे तिथल्या नोडल अधिकाऱ्याला देणे आवश्यक आहे. तिथल्या नोडल अधिकाऱ्याने परवानगी दिल्यानंतरच प्रवासाला सुरुवात होऊ शकते. महाराष्ट्र पोलीस जी ई पास पद्धत वापरत आहेत, तीच पद्धत नोडल अधिकारी वापरू शकतात, असे नियमावलीत म्हटले आहे.