बचपन में 5 कक्षा में एक कहानी पढ़ी थी हिंदी कि किताब में *ईदगाह*
हामिद अपनी दादी के लिए चिमटा खरीद के लता है।
काफी भवनिक और मानवीय संवेदना तथा एक दादी पोते के प्रेम को दिखाता है।
कैसे हामिद ने ना मिठाई खाई ना खिलौने लिए मेले में बस वह सब का मुंह देख कर मन को नियंत्रित करके रहा और अंत में उसे अपने दादी के जले हाथ की याद आई कैसे रोटी पकाते वक्त उसके हाथ जल जाते
और हामिद में चिमटा खरीदा
यह पर्व मानवीय संवेदना मानवता और आपसी प्रेम का पर्व है

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